507 Head संपादकीय टीम
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507 हैड और पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण जीवन, जल, संस्कृति और खेती की सच्ची रिपोर्टिंग।

22 प्रकाशित लेख•सत्यापित लेखक

507 Head संपादकीय टीम द्वारा लिखे गए लेख (22)

पशुपालनपशुपालन
3 नव॰ 2026•4 मिनट

पशुपालन

कृषि विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत उपयोगी पालतू पशुओं (जैसे गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सुअर और मुर्गी आदि) का पालन-पोषण, उनकी देखभाल, स्वास्थ्य सुरक्षा और चयन

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राजपूत राजवंश और मध्यकालइतिहास और विरासत
3 नव॰ 2026•4 मिनट

राजपूत राजवंश और मध्यकाल

गुर्जर-प्रतिहार वंश: 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच इस वंश ने अरब आक्रमणकारियों को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई और 'मारू-गुर्जर' वास्तुकला को बढ़ाया। [1] मेवा

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testing imageखेती-बाड़ी
26 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

खेती-बाड़ी

खेती-बाड़ी की सही और सफल जानकारी के लिए मिट्टी, पानी, मौसम और बाजार की मांग का तालमेल सबसे जरूरी है। भारत में प्रमुख रूप से तीन फसल चक्र होते हैं: खरीफ, रबी और

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गट्टे की सब्जीखान-पान
26 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

राजस्थानी गट्टे की सब्जी

राजस्थानी गट्टे की सब्जी राजस्थान का एक बहुत ही प्रसिद्ध और पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से बेसन (चने के आटे) और दही की मसालेदार ग्रेवी से बनाया

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राजस्थानी दाल बाटी चूरमाखान-पान
26 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

दाल बाटी चूरमा राजस्थान का सबसे लोकप्रिय, पारंपरिक और शाही व्यंजन है।

दाल बाटी चूरमा राजस्थान का सबसे लोकप्रिय, पारंपरिक और शाही व्यंजन है। यह केवल एक भोजन नहीं है, बल्कि राजस्थानी संस्कृति और वहां की मेहमाननवाज़ी की पहचान है।

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थार मरुस्थल के रेतीले धोरे और सूर्यास्त का दृश्यइतिहास और विरासत
24 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

रेत के धोरों के बीच 507 हेड: इतिहास, नहरी क्रांति और बदलता परिवेश

बीकानेर के छतरगढ़ क्षेत्र में 507 हेड केवल एक जल वितरण केंद्र नहीं, बल्कि मरुभूमि में जीवन और हरियाली की नई गाथा है।

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लहलहाते खेत और सुबह की ताजी धूपखेती-बाड़ी
19 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

नहरी क्षेत्र में खेती: कम पानी में अधिक उपज के पारंपरिक व आधुनिक गुर

नहरबंदी और सीमित जल उपलब्धता के बीच किसान कैसे मिट्टी की नमी सहेजकर बंपर पैदावार ले रहे हैं, जानिए इस रिपोर्ट में।

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मरुस्थलीय परिवेश में राठी गाय और उसका बछड़ापशुपालन
18 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

राठी गाय: थार मरुस्थल की कामधेनु और पशुपालकों की सच्ची पूंजी

कम चारे और भीषण गर्मी में भी भरपूर दूध देने वाली राठी नस्ल आज पूरे देश के पशुपालकों की पहली पसंद बन रही है।

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गाँव की चौपाल पर बैठे बुजुर्ग और पारंपरिक पगड़ीबुजुर्गों की सीख
17 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

बुजुर्गों की सीख: मौसम, मिट्टी और जिंदगी को परखने का अनमोल ज्ञान

जब मौसम विभाग नहीं था, तब ग्रामीण बुजुर्ग बादलों की चाल, हवा के रुख और पक्षियों की बोली से पूरे साल का हाल बता देते थे।

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पारंपरिक राजस्थानी थाली और बाजरे की रोटीखान-पान
16 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

बाजरे का सोगरा और कैर-सांगरी: थार के पारम्परिक स्वाद में छुपा सेहत का राज

मिट्टी के चूल्हे पर सिका कड़क सोगरा, शुद्ध मक्खन और सूखी सांगरी की सब्जी—यह केवल खाना नहीं, मरुभूमि का अमृत है।

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राजस्थानी लोक कलाकार और पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रसांस्कृतिक विरासत
15 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

धोरों में गूँजती मांड और लोकगीत: थार की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान

अलगोजा, कमायचा और खड़ताल की धुन पर जब रेगिस्तान में शाम ढलती है, तो सदियों पुरानी दास्तानें जीवंत हो उठती हैं।

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खेत में काम करता हुआ राजस्थानी किसानकिसान
14 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

रेगिस्तान के जांबाज किसान: रेत को सोना बनाने वाले अन्नदाताओं की दास्तान

कड़ाके की धूप और ठंडी रातों में नहर के पानी का पहरा देने वाले 507 हेड के किसानों का त्याग और समर्पण।

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किन्नू और फलों का हरा-भरा बगीचाखेती-बाड़ी
13 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

बीकानेर क्षेत्र में किन्नू और अनार के बगीचे: बंपर मुनाफे की नई राह

रेतीली जमीन पर बागवानी क्रांति: 507 हेड के किसान ड्रिप सिस्टम से मीठे किन्नू उगाकर लाखों कमा रहे हैं।

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रेगिस्तान में ऊँटों का झुंडपशुपालन
12 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

ऊँटनी का दूध और मरुस्थलीय डेयरी: स्वास्थ्य और आमदनी का नया केंद्र

औषधीय गुणों से भरपूर ऊँटनी के दूध की माँग देश-विदेश में बढ़ी, थार के पशुपालकों को मिल रहा नया बाजार।

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रात के समय खेत में पानी लगाता किसानकिसान
11 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

रात के सन्नाटे में नहरी पानी की बारी: किसान के धैर्य और हौसले की दास्तान

कड़ाके की ठंड और अंधेरी रातों में नहरी खाळे पर फावड़ा थामे किसान की पहरेदारी की वास्तविक रिपोर्ट।

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पारंपरिक राजस्थानी टांका और जल संचयनबुजुर्गों की सीख
10 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

पानी की एक-एक बूँद का मान: पुराने कुंडों और टांकों की अनूठी मरुस्थलीय जल परंपरा

आधुनिक पाइपलाइनों से सदियों पहले थार के लोगों ने छत और आगोर के हर कतरे को सहेजने का जो विज्ञान गढ़ा, वह आज भी प्रेरणा है।

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ताजी काचरी और देशी राजस्थानी सामग्रीखान-पान
9 अक्टू॰ 2026•4 मिनट

मतीरे की सब्जी और काचरी की चटनी: गर्मियों में ठंडक और मरुस्थलीय स्वाद

धोरों में बेल पर पकने वाले मतीरे और जंगली काचरी के औषधीय गुण और पारंपरिक जायके की अनूठी दास्तान।

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