रेगिस्तान के जांबाज किसान: रेत को सोना बनाने वाले अन्नदाताओं की दास्तान
कड़ाके की धूप और ठंडी रातों में नहर के पानी का पहरा देने वाले 507 हेड के किसानों का त्याग और समर्पण।

शहरों में जब लोग सुकून की नींद सो रहे होते हैं, तब 507 हेड के किसान कड़कड़ाती ठंड में टॉर्च की रोशनी में नहरी नाकों पर खड़े पानी का पहरा दे रहे होते हैं।
एक-एक बूंद पानी का सही हिसाब रखना, रेतीले धोरों को समतल कर मेड़बंदी करना और तेज आँधियों में भी फसलों की रक्षा करना किसी तपस्या से कम नहीं है।
गाँव के किसानों का कहना है कि खेती सिर्फ एक धंधा नहीं, बल्कि मिट्टी से किया गया पवित्र वादा है। फसल अच्छी हो या खराब, किसान कभी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता।
507 Head का उद्देश्य इन्हीं अनसुने अन्नदाताओं की मेहनत, उनके अधिकारों और उनकी वास्तविक आवाज को मुख्यधारा तक पहुँचाना है।

507 Head संपादकीय टीम
507 हैड और पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण जीवन, जल, संस्कृति और खेती की सच्ची रिपोर्टिंग।
