रात के सन्नाटे में नहरी पानी की बारी: किसान के धैर्य और हौसले की दास्तान

कड़ाके की ठंड और अंधेरी रातों में नहरी खाळे पर फावड़ा थामे किसान की पहरेदारी की वास्तविक रिपोर्ट।

507 Head संपादकीय टीमUpdated: 11 अक्टूबर 202611 अक्टूबर 2026 • 4 मिनट पठन
रात के समय खेत में पानी लगाता किसान

नहरी क्षेत्र में पानी की 'बारी' तय समय पर आती है—चाहे वह दोपहर की तपती धूप हो या आधी रात का अंधेरा। 507 हेड के खेतों में रात 2 बजे भी टॉर्च की रोशनी में किसान फावड़े से नाका बदलते दिखाई देते हैं।

एक पल की चूक से पानी पड़ोसी के खेत या निचले गड्ढे में बह सकता है, इसलिए पूरी रात जागकर निगरानी रखनी पड़ती है।

यह संघर्ष केवल फसल पकाने का नहीं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण और देश को अन्न देने की उस निस्वार्थ तपस्या का हिस्सा है जो हर किसान रोज़ जीता है।

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