मतीरे की सब्जी और काचरी की चटनी: गर्मियों में ठंडक और मरुस्थलीय स्वाद
धोरों में बेल पर पकने वाले मतीरे और जंगली काचरी के औषधीय गुण और पारंपरिक जायके की अनूठी दास्तान।
थार के रेतीले खेतों में वर्षा ऋतु के बाद मतीरे और काचरी की बेलें स्वतः ही फैल जाती हैं। कच्चे मतीरे की सब्जी और पके मतीरे का मीठा लाल गूदा रेगिस्तान की तपिश में अमृत के समान होता है।
काचरी को सिलबट्टे पर लाल मिर्च, लहसुन और जीरे के साथ पीसकर बनाई गई ताजी चटनी बाजरे की रोटी के साथ खाई जाती है। यह चटनी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है और लू से बचाती है।
शहरी बाजारों में अब इस देशी उपज की भारी मांग है और यह स्थानीय किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का साधन बन रही है।
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लेखक / संपादकीय टीम
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